36 फार्म हाउस मूवी रिव्यू  : हास्य और थ्रिलर दोनों का कॉम्बिनेशन आएगा नजर

36 फार्म हाउस मूवी रिव्यू : हास्य और थ्रिलर दोनों का कॉम्बिनेशन आएगा नजर

Anupriya Verma


कोविड की महामारी ने मनोरंजन जगत का पूरा खेल ही बदल कर रख दिया। अब दर्शकों के पास वेब सीरीज देखने के विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में गौर करें तो जहाँ एक तरफ इस महामारी ने ओटीटी की दुनिया को मेन स्ट्रीम मनोरंजन का हिस्सा बना दिया। वहीं दूसरी तरफ कोविड विषय के लिहाज से भी कई निर्देशकों की कहानियों का हिस्सा बना। लंबे अरसे के बाद, जब मशहूर निर्देशक सुभाष घई भी फिर से फिल्म मेकिंग की ओर आये हैं, तो उन्होंने भी फिल्म ‘36 फार्म हाउस के बैकड्रॉप में कोविड की कहानी ही चुनी है। फिल्म हास्य जॉनर की है, सुभाष घई कुछ युवा चर्चित कलाकारों के साथ इस फिल्म को लेकर आये हैं। हालांकि उन्होंने इस फिल्म का निर्देशन नहीं किया है। लेकिन इस फिल्म में वह पूरी तरह से मार्गदर्शक के रूप में रहे हैं। इसलिए इस फिल्म को सुभाष घई ब्रांड की फिल्म ही माना जा रहा है। उन्होंने इस फिल्म की कहानी लिखी है।

क्या है कहानी

कहानी 2020 में लॉक डाउन के बैकड्रॉप पर सेट है। मुंबई के बाहरी इलाके में 300 एकड़ में फैला हुआ फार्म हाउस है। अपने पति की मौत के बाद, वह यह फार्महाउस अपने बेटे के नाम पर कर देती है। लेकिन नकारा बेटा इस जिम्मेदारी को अच्छे से नहीं संभाल पाता है। वह पूरा बिजनेस बर्बाद कर देता है।  अब वह निकम्मा बेटा फिर से सारी सम्पत्ति हासिल करने और अपने फेल हुए बिजनेस के पैसों को दोबारा हासिल करने के लिए एक मजेदार गेम प्लान करता है।  लेकिन वह जैसा प्लान करता है, वैसा कुछ नहीं होता, बल्कि एक मर्डर हो जाता है।  अब इस मर्डर के पीछे कौन है, क्या वजह है कि मर्डर होता है। इन सबके बीच कई नए किरदार जुड़ते जाते हैं। फ़ार्म हाउस है तो लोगों की आवाजाही होती रहती है। इसके अलावा फिल्म में लाजिमी सी बात है कि जहाँ विजय राज और संजय मिश्रा जैसे कलाकारों का जमघट होगा, वहां हास्य नहीं होगा, ऐसा हो सकता है क्या? तो इस फिल्म में मर्डर मिस्ट्री तो है, लेकिन हास्य अंदाज़ में कहानी दर्शकों तक पहुंचती है। सम्पति के खेल के बीच लॉक डाउन के सिचुएशन के मेल से बनाई गई है कहानी।

बातें जो मुझे पसंद आयीं

प्रवासी मजदूर की बात

प्रवासी मजदूरों को लॉक डाउन के दौरान काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। निर्देशक ने उनके पॉइंट ऑफ़ व्यू को रखने की कोशिश की है। यह इस फिल्म की अच्छी बात है कि हल्के-फुल्के अंदाज़ में ही सही, इस विषय को नोटिस किया गया है।

विषय अच्छा है

लॉक डाउन के विषय में हुई परेशानियां और परिस्थितियों को बेहतर तरीके से चुना गया है। परिवार के साथ वीकेंड पर देखी जा सकती है फिल्म।

अभिनय

फिल्म में विजय राज इस बार अपनी पिछली फिल्मों से थोड़े अलग अंदाज़ में नजर आये हैं। संजय मिश्रा कम समय के लिए ही स्क्रीन पर नजर आते हैं, लेकिन प्रभावित करते हैं। अमोल परासर और बरखा सिंह का काम भी अच्छा है। अश्विनी और माधुरी भाटिया ने भी अच्छा प्रयास किया है।

संगीत

फिल्म का गीत-संगीत अच्छा है

बातें जो और बेहतर हो सकती थीं

फिल्म की कहानी 2020 के बैक ग्राउंड पर है। लेकिन फिल्म में जिस तरह के संवाद और सेट आप क्रिएट किया गया है। वह 90 के दौर का है। इसे 2020 के दशक को ही ध्यान में रख कर बनाया जा सकता था।  इसके अलावा

कहानी में अगर मर्डर मिस्ट्री दिखाई ही जानी थी, तो इसे बेहतर तरीके से क्रिएट किया जा सकता था। चूँकि फिल्म सुभाष घई ब्रांड की है तो फिल्म से काफी उम्मीदें बढ़ जाती हैं। इसमें और अधिक हास्य दृश्य, संवाद और मजेदार दृश्य गढ़े जा सकते थे।

फिल्म : 36 फार्म हाउस

कलाकार : अमोल परासर, बरखा सिंह, संजय मिश्रा, विजय राज

निर्देशक : राम रमेश शर्मा

चैनल : जी 5

रेटिंग : ढाई स्टार