Movie Review ! Bachchhan Pandey ! अक्षय कुमार के फैंस के लिए है एंटरटेनमेंट का फूल डोज

Movie Review ! Bachchhan Pandey ! अक्षय कुमार के फैंस के लिए है एंटरटेनमेंट का फूल डोज

Anupriya Verma

अक्षय कुमार के फैंस की यह खासियत रही है कि अक्षय साल में पांच फिल्में भी करें, तो उनके फैंस उनकी हर फिल्म को देखना पसंद करते हैं और फिल्म को काफी एन्जॉय भी करते हैं, ऐसे में अक्षय की 'सूर्यवंशी 'और 'बेलबॉटम 'के बाद, बच्चन पांडे अगली फिल्म है। कृति सैनन, जैकलीन फर्नांडिस और अरशद वारसी जिस फिल्म में होंगे, उस फिल्म से मेरे जैसे सिने प्रेमियों को पूरी उम्मीद रहेगी ही कि फिल्म में धमाल होने वाला है।  खुद अक्षय कुमार इस बात को स्वीकारते हैं कि कॉमेडी फिल्में बनाना आसान नहीं होता।  मैं भी इस बात से इत्तेफाक रखती हूँ, क्योंकि कॉमेडी फिल्मों में कई बार चीजें दोहराये जाने की परेशानी आ सकती है, इस फिल्म के साथ कुछ-कुछ वैसा ही होता हुआ नजर आया है। तो होली में गोली चलाने वाले 'बच्चन पांडे' का भौकाल कैसा है, फिल्म में, मैं उसके बारे में विस्तार से बताने जा रही हूँ।

क्या है कहानी

फिल्म की कहानी में मायरा ( कृति सैनन) केंद्र में हैं, उसकी चाहत है कि वह फिल्म निर्देशिक बने, लेकिन वह फिल्म ऐसे ही नहीं बनाना चाहती है, बल्कि वह किसी ऐसी कहानी पर काम करना चाहती है कि लोग उन्हें भूलें नहीं और इसलिए वह निर्णय लेती है कि वह गैंगस्टर पर फिल्म बनाएगी। हर अस्टिटेंट निर्देशक की तरह, मायरा के जेहन में भी यही होता है कि शायद वह कुछ अलग कहानी कह कर निर्देशक बनती है, तो पूरी दुनिया में मशहूर हो जाएँगी।  और इसी क्रम में उसके रिसर्ज में बच्चन पांडे का नाम आता है,  जिस पर वह बायोपिक बनाने की प्लानिंग करती है वह अपने दोस्त विशु (अरशद वारसी), जिसका एक्टर बनने का सपना है, उसके  साथ बघवा पहुँचती है, जहाँ उसकी मुलाकात बच्चन पांडे(अक्षय कुमार) से होती है, जो कि बेहद खूंखार है, उसकी सिर्फ आँखें ही नहीं, दिल भी पत्थर का ही है, उसने अपनी प्रेमिका ( जैकलीन फर्नांडिस) को भी मार दिया है, बच्चन पांडे की मनोहर कहानियां नहीं, मर्डर की कहानियां फेमस हैं। दिलचस्प यह भी है कि ऐसा बच्चन केवल अपने मजे के लिए ही करता है। बघवा, उत्तर भारत का एक ऐसा इलाका है, जो कुख्यात है, वहां 'बच्चन पांडे 'का राज चलता है, जो अपने मजे के लिए लोगों को मारता रहता है। उसके लिए खून से खेलना ही उसके लिए सबकुछ है। वह इंसान को इंसान नहीं मच्छर समझता है और इंसानों को उसी तरह मारने में भी यकीन करता है। यह 'बच्चन पांडे', न सिर्फ लोगों को मारता है, बल्कि पुलिस की भी जम कर धुनाई करता है। वह खुद को किसी गॉडफादर से कम नहीं समझता है। और इन सबमें उसका साथ देते हैं, पेंडुलम, बफरिया और कांडी व गुरु जैसे लोग। लेकिन क्या 'बच्चन पांडे' का रूप बदलता है या नहीं, उसका हृदय परिवर्तन होता है या नहीं, यह सबकुछ जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

Source : Instagram I @akshaykumar

बातें जो मुझे अच्छी लगी

  • फिल्म के मेकर्स ने कोई दावा नहीं किया है कि वह लॉजिकल फिल्म लेकर आ रहे हैं, ऐसे में फिल्म में वह पूरी तरह से मसाला ही परसोते हैं।
  • अक्षय कुमार की मसाला फिल्मों से जो भी वाकिफ हैं, उनके फैंस के लिए यह पैसा वसूल फिल्म होगी।
  • फिल्म में कुछ संवाद और कुछ दृश्य हिस्सों में खूब हंसाते हैं।
  • निर्देशक ने कॉमेडी जॉनर में थोड़ा अलग करने की कोशिश की है, विषय और ट्रीटमेंट अलग है, अब तक हिंदी फिल्मों में कॉमेडी किरदार को इतना खूंखार नहीं  दिखाया गया है, जहाँ एक तरफ कुछ दृश्यों में आपको बच्चन से डर लगता है, तो साथ ही साथ दूसरी तरफ उनके एक्सप्रेशन से आपको हंसी भी आएगी।
  • अक्षय कुमार अपने फैंस को अपने अंदाज़ से निराश नहीं करेंगे, उन्होंने एक्शन और कॉमेडी का खूब तड़का लगाया है।
  • अक्षय की गैंग जिसमें पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकार हैं, उनके आने से भी फिल्म में मजा बढ़ता है।
  • फिल्म के गाने, सिनेमेटोग्राफी अच्छी है।
  • 'बच्चन पांडे 'की बैकस्टोरी दिलचस्प है।
Source : Instagram I @akshaykumar

बातें जहाँ, बेहतर होने की गुंजाईश नजर आयीं

एक बड़ी कमी, जो फिल्म में नजर आती है कि फिल्म पहले ही हिस्से में 'बच्चन पांडे' के किरदार को डेवलप करने में गई है कि फिल्म का पेस स्लो हो गया है और यही वजह से कि कहीं न कहीं जैसे-जैसे कहानी आगे जाती है, आप दिलचस्पी फिल्म में खोने लगते हैं। कॉमेडी निर्देशकों के साथ यह भी एक बड़ा चैलेंज आता है कि वह अपनी फिल्मों में रिपिटेशन से बचें, लेकिन इस फिल्म में फरहाद सामजी यह करने में थोड़े चूके हैं, इस फिल्म में उनकी पिछली फिल्मों का ही हैंगओवर नजर आया है।

अभिनय

अक्षय कुमार अपने फैंस के बीच, जिस रूप में फेमस में हैं, उन्हें दर्शक काफी पसंद भी करेंगे। अक्षय ने अपने लुक, अंदाज़ और डायलॉगबाजी में कोई कमी नहीं छोड़ी है, उन्होंने खूंखार किरदार में भी कॉमेडी टच जोड़ा है। जैकलीन फर्नांडिस के लिए फिल्म में कुछ करने के लिए खास गुंजाईश नहीं रही है। कृति ने अपना किरदार शानदार तरीके से प्रेजेंट किया है, इस कहानी में वह इम्प्रेसिव लगी हैं। अरशद वारसी कुछ दृश्यों में अच्छे लगे हैं, लेकिन कई जगहों में उन पर सर्किट का हैंग ओवर नजर आया है। शेष कलाकारों में पंकज त्रिपाठी, अभिमन्यु सिंह ने बेहतर काम किया है।

कुछेक कमियों के बावजूद, मुझे लगता है कि होली के मौके के हिसाब से अक्षय कुमार के फैंस, इस फिल्म को एन्जॉय करना पसंद कर सकते हैं। वैसे, अक्षय कुमार ने इस बार अपने किरदार को अलग बनाने में, मेरे लिहाज से कोई कमी नहीं छोड़ी है, मसाला एंटरटेनमेंट देखने वालों के लिए होली पर यह अच्छी आउटिंग हो सकती है, ऐसा मुझे लगता है।

फिल्म – बच्चन पांडे

कास्ट – अक्षय कुमार, कृति सेनन, जैकलीन फर्नांडीज, अरशद वारसी, पंकज त्रिपाठी, अभिमन्यु सिंह  और अन्य

डायरेक्टर – फरहाद सामजी

मेरी रेटिंग 5 में से 3 स्टार