अभी कुछ दिनों पहले ही शेफाली शाह से मुलाकात हुई, उनकी लेटेस्ट रिलीज जलसा’ के लिए। इस दौरान विद्या बालन भी साथ थीं, हमारी बातचीत का सिलसिला जारी था, तभी एक सवाल सामने आया कि शेफाली और विद्या बालन ने सबसे पहले खुद को पहली बार पोस्टर पर कहाँ और कब देखा था। विद्या ने बताया कि उनकी पहली फिल्म ‘परिणीता’ के दौरान, वहीं दूसरी तरफ शेफाली ने बताया कि जोया अख्तर की फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ में उन्होंने खुद को पहली बार पोस्टर में देखा और अपनी वेब सीरीज ‘ह्यूमन’, जो कि हाल ही में रिलीज हुई है, उस वक़्त उन्होंने पोस्टर गर्ल के रूप में पाया, शेफाली की यह बात मेरे जेहन में अटक गई, मैं वापस आई, मैंने आकर शेफाली की फिल्मोग्राफी देखी। मतलब 27 साल से अभी लंबा करियर शेफाली का है और अब वह पोस्टर में नजर आने लगी हैं। मेरे जेहन में उस वक़्त सिर्फ यही बात आई कि शेफाली के धैर्य को सलाम, उनकी जैसी सशख्त अभिनेत्री, जिन्होंने हर छोटे से किरदार में भी खुद को साबित किया है, फिर चाहे हो ‘बनेगी अपनी बात ‘धारावाहिक हो या ‘सत्या’ जैसी फिल्म हो, चुलबुली अदाकारा से लेकर इंटेंस किरदार या ‘सत्या’ वाली रापचिक स्टाइल, ऐसे क्या एक्सप्रेशन हैं, जो शेफाली ने नहीं किये हैं, लेकिन अब जाकर वह बड़े स्तर पर सामने आई हैं, अब उनकी काबिलियत को नई दिशा मिलने लगी है। सच कहूँ तो, अब जाकर उनकी अभिनय क्षमता और किरदारों का ‘जलसा ‘इंडस्ट्री में सजना शुरू हुआ और मैं और मेरे जैसे हर सिने प्रेमी के लिए, यह एक जीत है कि आखिरकार इतने लम्बे इंतजार के बाद शेफाली को वैसे किरदार मिल रहे हैं,  जिन्हें वह डिसर्व करती हैं। शेफाली ने एक दौर ऐसा भी देखा है, जब एक बड़ी फिल्म में उन्हें बिना बताये, उन्हें रिप्लेस कर दिया गया था और उन्हें इसकी जानकारी, सुबह के अख़बार से मिली थी, उस दिन शेफाली का दिल टूटा था, लेकिन फिर भी शेफाली ने खुद को बिखरने नहीं दिया और आलम इन दिनों यह है कि ओटीटी पर किसी प्रोजेक्ट में शेफाली का होना सफलता की गारंटी माना जा रहा है। शेफाली ने इस बातचीत में अपने अभिनय करियर से जुड़ीं कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें शेयर की हैं, जिसका अंश मैं यहाँ शेयर कर रही हूँ।

ओटीटी की दुनिया है गेम चेंजर

शेफाली मानती हैं कि ओटीटी की दुनिया, उनके लिए गेम चेंजर रही हैं, फिल्मों में उनके लिए लोगों ने चांस लेने की कोशिश नहीं की थी। शेफाली साफ कहती हैं कि अब वह वैसे ही किरदार निभाना पसंद करती हैं, जो उन्हें उत्साहित करता है और प्रेरित करता है।

वह कहती हैं

जब ‘दिल्ली क्राइम’ बन रही थी, हमें पता नहीं था कि यह कहाँ पर रिलीज होगी। यह प्री सोल्ड सब्जेक्ट नहीं थी। यह ओटीटी पर तब आई, जब संडास फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनी। और मैं अब मानती हूँ कि ओटीटी को कोई स्टार्स नहीं चाहिए, यह टैलेंट को बढ़ावा दे रही है। कई आर्टिस्ट ने आज इस माध्यम से अपनी जगह बना ली है।

प्री नोशन है लोगों में

शेफाली कहती हैं कि यह सच है कि शुरुआती दौर की अगर वह बात करें, तो लोगों ने उन्हें स्टीरियोटाइप बना दिया था।

Source : Instagram I @shefalishahofficial

वह कहती हैं

हाँ, मुझे लेकर प्री नोशन थी, मैंने काफी स्ट्रांग किरदार किये हैं, और उनमें से कुछ मेरी ही चॉइस थे, लेकिन मैं जरूर कहना चाहूंगी कि मुझे इस नोशन को तोड़ने में वक़्त लगा। मैंने बाद में काफी ना कहना शुरू किया, जब मेरे पास एक जैसे किरदार आने लगे तो।  इंडस्ट्री में एक ओपिनियन बन गई थी, मुझे जिस तरह से लोगों ने काम करते हुए देखा था, सबको लगने लगा कि मैं काफी सीरियस हूँ और मेरे से बात करना लोगों को मुश्किल लगता है, उन्हें लगता है कि मैं डोमिनेटिंग भी हूँ, लेकिन जब लोग मेरे से बात करना शुरू करते हैं, तो उनको समझ आता है कि मैं तो बहुत नॉर्मल और मस्तीखोर हूँ।

वह आगे और विस्तार से बताती हैं

मुझे जिस तरह के रोल्स अब मिलने शुरू हुए हैं, मुझे अब लगता है कि मेरे प्रति निर्देशकों का रवैया बदला है, जो कि बेहद जरूरी भी था। सच कहूँ तो मुझे माँ का किरदार निभाने में प्रॉब्लम नहीं हैं, मुझे प्रॉब्लम है, जिस तरीके से उन किरदारों को रखा जाता है, मैंने न जाने इस चक्कर में कितने रोल नहीं किये हैं। अब तो मैं वैसे ही किरदार करती हूँ, जो मुझे उत्साहित करते हैं। वरना, बेहतर है मैं घर पर ही बैठ जाऊं।

रिजेक्ट तो तब होती, जब ऑडिशन तक पहुँचती

शेफाली अपने उस दौर की बात को शेयर करती हुईं कहती हैं कि उन्हें रिजेक्शन प्रोसेस तक पहुँचने का मौका, इसलिए नहीं मिला, क्योंकि कोई मुझे कुछ ऑफर ही नहीं करता था।

Source : Instagram I @shefalishahofficial

वह कहती हैं

मुझे याद है, मैंने एक बार फेस टू फेस रिजेक्शन झेला, एक बड़ी फिल्म थी, उस फिल्म के निर्देशक चाहते थे कि मैं उसमें काम करूँ, मैं उसमें काम शुरू भी कर दिया, लेकिन एक दिन मैं उठी और अख़बार देखा, मुझे रातों-रात रिप्लेस कर दिया गया। ठीक है, उन्होंने रिप्लेस किया, लेकिन उन्होंने मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा। लेकिन मैंने अपने मन को यहीं समझाया कि यह करके, उन्होंने अपना व्यवहार दर्शाया।

कैमरे के पीछे की दुनिया भी उत्साहित करती है

शेफाली कहती हैं कि वह जितना एन्जॉय कैमरे के समाने रह करती हैं, उतना ही कैमरे के पीछे भी करती हैं। यही वजह है कि उन्होंने कुछ शॉर्ट्स फिल्म्स का भी निर्देशन किया है और आगे और भी फिल्में निर्देशित करना चाहेंगी।

वह कहती हैं

मैंने दो शॉर्ट फिल्में बनाई हैं और मेरे लिए यह किसी नशे की तरह है। साथ ही, एक एक्टर के रूप में, मुझे अच्छे से समझ आता है कि निर्देशक क्या कहना चाहता है। मैं किसी भी फिल्म को हाँ, निर्देशक को देख कर ही करती हूँ, मैं काफी डिस्कस करती हूँ, काफी सवाल पूछती हूँ, लेकिन जब मैं सेट पर होती हूँ, मैं अपना व्यूज किसी पर नहीं थोपती हूँ, क्योंकि मैं खुद निर्देशक की कुर्सी पर बैठती हूँ, तो उनकी बारीकियों को समझ पाती हूँ।

विद्या बालन के साथ मिला शानदार मौका

शेफाली शाह, विद्या बालन को काफी एडमायर करती हैं। विद्या के साथ पहली बार ‘जलसा’ में काम करने के बाद, शेफाली की चाहत यही है कि वह आगे भी विद्या के साथ ढेर सारे प्रोजेक्ट्स करें

Source : Instagram I @shefalishahofficial

वह कहती हैं

मुझे विद्या के साथ बार-बार काम करने का मौका मिले, तो मैं करूंगी। इसमें कोई शक नहीं है कि फिल्म की स्क्रिप्ट शानदार थी, जिसने मुझे टच  किया, लेकिन फिल्म को हाँ कहने की वजह विद्या भी थीं। मेरे मन में विद्या के लिए काफी रिस्पेक्ट है और मैंने उनके काम को देखा है और खूब सराहा है। मुझे उनकी खास बात यही लगती हैं कि वह कॉन्फिडेंस से भरपूर हैं और काफी ईमानदार हैं।


हाउस हेल्प हैं तो हम हैं

शेफाली ने अपनी फिल्म जलसा में हॉउस हेल्प का किरदार निभाया है और उन्हें अपने इस किरदार के लिए काफी लोकप्रियता मिल रही है। शेफाली स्पष्ट रूप से कहती हैं कि उन्हें यह किरदार निभाने में कोई भी हिचक नहीं थी।

Source : Instagram I @shefalishahofficial

वह कहती हैं

हाउस  हेल्प हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती हैं, हम बाहर जाकर काम कर पाते हैं, क्योंकि वह हमारा ध्यान रख पाती हैं, हमारे घर का सारा काम कर जाती है। लेकिन मैंने रुखसाना किरदार के लिए कोई भी रेफरेंस नहीं लिया है। मैंने उसे अपने तरीके से ही दर्शाया है। वैसे मैं सच कहूँ, तो मुझे कूकिंग करने में काफी मजा आता है।  इसलिए उस रूप से देखें तो मेरे किरदार का यह एक्सटेंशन ही है। मुझे झाड़ू, बर्तन, पोंछा, यह सबकुछ मैंने किया है मेरे घर पर।

वाकई, शेफाली शाह की ‘जलसा ‘मैंने देखी, और मैं बहुत ही ईमानदारी से कहना चाहूंगी कि जिन दृश्यों में भी शेफाली नजर आई हैं, वह छा गई हैं, फिल्म में एक दृश्य है, जब वह अपना पूरा गुस्सा निकाल रही हैं, एक हॉउस हेल्प पर किसी फ़िल्मी कैमरे की नजर, जिस तरह से इस फिल्म में गई है और शेफाली ने इन दृश्यों को निभाया है, वह कमाल का है। शेफाली के अभिनय से मैं तो बोर नहीं होती हूँ कभी। ‘दिल धड़कने दो ‘में उन्होंने जो केक वाला सीन किया है, उफ्फ, एक औरत के फ्रस्टेशन को निकालने के लिए, इतना पॉवरफुल सीन, वह भी साइलेंस में, मेरे जेहन में दूसरा नहीं आता है। शेफाली आगे भी, अपने किरदारों में नयापन लाती रहेंगी और दर्शक उनसे बोर नहीं होंगे, मुझे यही उम्मीद है।