Exclusive ! गीतांजलि कुलकर्णी ! मैं रियल लाइफ में भी रिश्तों और इमोशन को 'गुल्लक' में संजों कर रखने में करती हूँ विश्वास

Exclusive ! गीतांजलि कुलकर्णी ! मैं रियल लाइफ में भी रिश्तों और इमोशन को 'गुल्लक' में संजों कर रखने में करती हूँ विश्वास

Anupriya Verma

मेरे पापा, इन दिनों धीरे-धीरे ओटीटी की दुनिया से वाकिफ हो रहे हैं, लेकिन कुछ दिनों पहले, उन्होंने जब कुछ ओटीटी प्लैटफॉर्म्स को सर्च किया, तो उन्हें कई शोज के ट्रेलर को देख कर लगा कि इस पर क्राइम और थ्रिलर जैसे शोज ही ज्यादा हैं, फिर उन्होंने मुझसे पूछा कोई पारिवारिक शोज नहीं हैं, मैंने फिर उन्हें गुल्लक वेब सीरीज के दोनों सीजन देखने को कहा। उन्होंने देखा और अब वह मुझसे ज्यादा उत्साहित हैं कि इस शो का सीजन 3 आ रहा है, पापा के शब्दों में, गुल्लक रिश्तों को बारीकियों को समझने वाला और इमोशनल शो है, पापा का मानना है कि 90 के दशक में ऐसे पारिवारिक शोज खूब कनेक्ट किया करते थे, फिर चाहे वह शाह रुख खान का शो फौजी, सर्कस हो या हमलोग। पापा को इस शो को देख कर, ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की भी याद आयी।  जी हाँ, दरअसल, अपने केवल दो ही सीजन से सोनी लिव के शो गुल्लक ने आम लोगों के दिलों में एक खास जगा बना ली है, इस शो की खासियत इसका आम होना है, आम लोगों से जुड़ीं एक आम कहानी ही पूरी ईमानदारी से शायद कह पाने में इस शो के मेकर्स कामयाब हुए हैं, इसलिए शो का तीसरा सीजन को लेकर भी उत्सुकता है, ऐसे में मैंने शो में मुख्य किरदार निभा रहीं अभिनेत्री गीतांजलि कुलकर्णी से बातचीत की, जिन्होंने अपने अंदाज़ से इस शो के माध्यम से, अलग तरह की फैन फॉलोइंग बना ली है। कई नामचीन पुरस्कारों से सम्मानित गीतांजलि के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है, लेकिन वह इस जर्नी से खुश हैं संतुष्ट हैं, मैं यहाँ उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश पेश कर रही हूँ। गीतांजलि ने अपने पति अतुल कुलकर्णी के बारे में भी इस बातचीत में बात की है

आम लोगों ने महसूस किया है कनेक्शन

गीतांजलि कहती हैं कि जब वे लोग पहला सीजन गुल्लक का शूट कर रही थीं, उस वक़्त इसका अनुमान नहीं था कि सफर यहाँ तक आएगा

वह कहती हैं

जब हम गुल्लक का पहला सीजन शूट कर रहे थे, उस वक़्त हमें ही नहीं पता था कि यह शो कहाँ पर आएगा, लेकिन जिस तरह से यह शो, अपने सेकेंड सीजन से लोकप्रिय होने लगा, मुझे खुद अभी विश्वास नहीं होता है,  अभी हमने अपने तीसरे सीजन में काफी मेहनत की है, हमारे जो लेखक हैं दुर्गेश सिंह, उन्होंने काफी साहित्य पढ़ा है, उनका अभ्यास है, वह मिडिल क्लास को काफी बारीकी से देखते भी हैं और समझते भी हैं, तो उन्होंने अपने अनुभव इसमें डाले हैं और इसे आकार दिया है। मेरा मानना है कि शो में वहीं दिखाया जा रहा है, जो हम सबके बीच होता है, इसलिए लोग इससे एक कनेक्शन महसूस कर पाते हैं।

ओटीटी पर आये हर किस्म के शोज

गीतांजलि का मानना है कि यह सोच गलत है कि ओटीटी केवल थ्रिलर और क्राइम ही परोस रहा है,

वह कहती हैं

ऐसा नहीं है, सिर्फ क्राइम और थ्रिलर ही है ओटीटी पर, बल्कि हर तरह के शोज हैं और यह अच्छा भी है कि हर किस्म का कॉन्टेंट आ रहा है और हर तरह के कॉन्टेंट आने भी चाहिए। ओटीटी का सबसे बड़ा फायदा ही यही है कि यहाँ कोई सेंसरशिप नहीं है, तो काफी एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं। हाँ, लेकिन मैं यह जरूर कहूँगी कि गुल्लक की कामयाबी ने यह प्रूव कर दिया है कि ऐसे विषयों के भी काफी सारे दर्शक हैं। सबसे अच्छी बात क्या है, अभी लगातार हर कोई खुद को एक्सप्लोर कर रहा है, फिर चैनल मौके दे रहे हैं और फिर जिनका काम अच्छा होगा, उन्हें आगे सीजन में काम करने के मौके मिल रहे हैं, तो यह फेज अच्छा है। लेकिन मैं यह बात गारंटी के साथ कह सकती हूँ कि गुल्लक जैसे शोज और आएंगे और पसंद किये जायेंगे।

टाइपकास्ट होने से बचने की कोशिश

गीतांजलि इस बात को मानती हैं कि गुल्लक की कामयाबी के बाद, उनके पास लगातार वैसे ही कई और ऑफर आने लगे थे, ऐसे में वह कहती हैं कि बतौर एक अभिनेत्री उनकी यही कोशिश होती है कि खुद को टाइपकास्ट न करें।

वह कहती हैं

मैं इस बात की कोशिश करती हूँ कि खुद को रिपीट न करूँ। आपने देखा होगा आर्या में एक छोटा ही सही, लेकिन अलग किरदार किया है, मेरी एक मराठी फिल्म में समलैंगिक किरदार किया है, ताजमहल में भी मैंने अलग तरह का काम किया है, हालांकि कभी-कभी ऐसा होता है कि आपने तुरंत कोई किरदार किया है, वैसा फिर से किरदार मिल रहा है, लेकिन कहानी अच्छी होती है, तो फिर वैसे किरदार कर लेती हूँ। लेकिन मैंने अबतक यही कोशिश की है कि एक जैसा काम न करूँ।

पसंद है खुशियों की गुल्लक परिवार के साथ बांटना

गीतांजलि बताती हैं कि उन्हें अपने परिवार, माँ, दोस्तों यारों के साथ अपनी खुशियों की गुल्लक बांटना पसंद है, वह खूब गिफ्ट्स देती हैं, पार्टियां देती हैं, जब भी उन्हें कामयाबी मिलती है।

वह कहती हैं

मैं जब 1996 में एनएसडी से पास आउट हुई थी, तो मुझे वही एक असाइमेंट मिली थी, वहां एक नाटक शूट किया था, मुझे साढ़े सात हजार मिले थे और उससे मैंने मेरी माँ के लिए कुकिंग रेंज ख़रीदा था। और मेरी मम्मी बहुत खुश हुई थी, जब भी मुझे पैसे मिले हैं, मैंने अपने दोस्तों, परिवार के साथ शेयर की है, मुझे खाना-खिलाना ये सब अच्छा लगता है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को मिले मौके तो नहीं है बुराई

गीतांजलि का मानना है कि अगर सोशल मीडिया के माध्यम से टैलेंट्स सामने आ रहे हैं, तो इसमें बुराई नहीं है

वह कहती हैं

सोशल मीडिया को वर्तमान दौर में इग्नोर नहीं किया जा सकता है और अगर सोशल मीडिया से कुछ टैलेंट आ रहे हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है, हाँ, मुझे ऐसा जरूर लगता है कि ट्रेंड एक्टर जो होता है, उनका विजन अलग होता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि नॉन ट्रेनिंग वाले एक्टर्स अच्छा काम नहीं कर सकते हैं, मेरी फिल्म कोर्ट में ही कई नॉन एक्टर्स थे और उन्होंने बेहतरीन काम किया था।

अतुल हैं सबसे अच्छे दोस्त

गीतांजलि कुलकर्णी, अपने पति अतुल कुलकर्णी के बारे में कहती हैं कि वह दोनों ही काफी अच्छे दोस्त हैं। और इसलिए उनकी बहुत अच्छी बॉन्डिंग हुई

वह बताती हैं

मैं और अतुल पहले दोस्त बने, फिर हमने शादी की, सबसे अच्छी बात है, हम आज भी अच्छे दोस्त हैं। दोनों एक दूसरे के काम की कद्र करते हैं और अतुल काफी वर्क कोहलिक हैं, और मुझे उन्हें काम करते देखना अच्छा लगता है, हम दोनों की अच्छी बात यह है कि हम दोनों में किसी भी तरह का क्लैश नहीं है, हम दोनों एक दूसरे के काम को समझते हैं और एक दूसरे के वर्क प्रेशर को भी, मैं अपनी बात कहूँ तो अभिनय के अलावा मुझे बच्चों को पढ़ाना पसंद है और कुत्तों के साथ वक़्त बिताना भी अच्छा  लगता है।

वाकई, इतने पुरस्कार से सम्मान हासिल करने के बावजूद और अभिनय में इतना समय बिताने के बाद भी आज भी गीतांजलि कुलकर्णी में अपने काम के प्रति, बेस्ट करने की ललक मुझे किसी न्यू कमर्स की तरह ही दिखती है, शायद उनकी यही खूबियां हैं कि वह जब भी स्क्रीन पर आती हैं, अपने किरदार के माध्यम से छाप छोड़  ही जाती हैं और दर्शक उनके काम के मुरीद हुए बगैर नहीं रहते हैं। ऐसे में, मैं तो फिर से गुल्लक में उन्हें देखने के लिए काफी उत्साहित हूँ।