प्रतीक गाँधी और पत्रलेखा निभाएंगे 'फुले' में महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का किरदार, फिल्म 2023 में आएगी दर्शकों के सामने

प्रतीक गाँधी और पत्रलेखा निभाएंगे 'फुले' में महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का किरदार, फिल्म 2023 में आएगी दर्शकों के सामने

Anupriya Verma

सिनेमा की दुनिया की यही खासियत रही है, खासतौर से भारतीय सिनेमा की कि वह लगातार ऐसी शख्सियत की कहानियों को दर्शकों के सामने लाते हैं, जिन्होंने इस देश के कल्याण में मुख्य रूप से योगदान दिया है, ऐसी ही शख्सियत में दो नाम शामिल हैं, वह हैं महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले। मैं तो पूरी तरह से इस बात को मानती हूँ कि ऐसी कहानियां सामने आती रहनी चाहिए और ऐसे में जब अब यह खबर आई है कि महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले पर बायोपिक फिल्म फुले आने वाली है, मैं बेहद खुश हूँ और उत्साहित भी हूँ। साथ ही फिल्म में प्रतीक गाँधी और पत्रलेखा का मुख्य किरदारों में होना, इस फिल्म को और अधिक सार्थक बनाता है। फिल्म का फर्स्ट लुक, महात्मा फुले की 195वीं वर्षगांठ के मौके पर‌ किया गया है।

कभी नहीं भूला जा सकता है, फुले के योगदान को

यह हकीकत है कि  देश में सामाजिक बदलाव लाने और महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभानेवाले महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले, दो ऐसी महान शख़्सियतें रहीं हैं, जिनके योगदान को देश कभी नहीं भुला पाएगा। ऐसे में लोगों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाने की दिशा में काम करनेवाली पति-पत्नी की इस जोड़ी पर जो बायोपिक फिल्म फुले आने जा रही है, तो इस बात की तसल्ली है कि नए जेनरेशन को भी इन महान कलाकारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।

दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बनाने की जिम्मेदार, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अनंत महादेवन ने ली है। प्रतीक गांधी और पत्रलेखा जैसे उम्दा कलाकार समाज सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर मशहूर महात्मा और सावित्री फुले की मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे।

यहाँ देखें ऑफिशियल घोषणा

खास रहा है योगदान

मैं यहाँ यह बात जरूर बताना चाहूंगी कि महात्मा फुले‌ और सावित्री फुले‌ ने एक साथ मिल कर,  छुआछूत और जातीय भेदभाव के ख़िलाफ़,  लम्बे समय तक आंदोलन चलाया था, उन्होंने सत्य शोधक‌‌ समाज की स्थापना करते हुए, पिछड़ी जाति के लोगों के लिए,  समान अधिकारों की मांग की थी और संघर्ष किया था। दोनों का ही महिलाओं को स्कूली शिक्षा दिलाने‌ के क्षेत्र में भी बहुत योगदान है।"

प्रतीक खुश हैं यह किरदार निभा कर

प्रतीक गाँधी बेहतरीन अभिनेता है, ऐसे में वह इस किरदार में ढल कर खुश हैं।

उन्होंने इस बारे में कहा

महात्मा फुले का किरदार निभाना और दुनिया के सामने उनके व्यक्तित्व को पेश करना मेरे लिए गौरव की बात है। यह पहला मौका है जब में किसी बायोग्राफ़ी में एक अहम किरदार निभा रहा हूँ। इस किरदार को निभाना, मेरे लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, मगर एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व होने के नाते महात्मा फुले के रोल को निभाने को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूँ।

प्रतीक आगे कहते हैं

मुझे याद है कि फ़िल्म की कहानी सुनने के बाद,  मैंने फ़ौरन ही इस फ़िल्म में काम करने के लिए हामी भर दी थी। कुछ किरदारों पर किसी का नाम लिखा होता है और मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी है कि अनंत सर ने मुझे इस फ़िल्म में काम करने का ऑफर दिया।

महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली महिला रहीं फुले

पत्रलेखा, जो कि फिल्म में सावित्रीबाई फुले के किरदार में हैं, उन्होंने इस बात की ख़ुशी जाहिर की है कि यह एक महिला प्रधान फिल्म है

मेरी परवरिश मेघालय के शिलांग में हुई है। यह एक ऐसा राज्य है जहां पर महिलाओं के हक़ों और फ़ैसलों को पुरुषों से अधिक अहमियत दी जाती है। ऐसे में नारी-पुरुष समानता का विषय मेरे दिल‌ में एक बेहद अहम स्थान रखता है। सावित्रीबाई ने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में पूरी तरह से घरेलू सहयोग से लड़कियों के लिए एक स्कूल का निर्माण किया था। महात्मा फुले ने विधवाओं के पुनर्विवाह कराने और गर्भपात को नियंत्रित करने के लिए एक अनाथ आश्रम की भी स्थापना की थी। ये फ़िल्म मेरे लिए एक बहुत खास फ़िल्म होगी।

अनकही कहानियों को कहना है जरूरी

इस बारे में निर्देशक अनंत महादेवन का भी कहना है कि ऐसी अनसुनी और अनकही कहानियां कहनी जरूरी है फिल्मों के माध्यम से।

वह कहते हैं

हमारे देश में ऐसी कई अनकही कहानियां मौजूद हैं जिनके बारे में लोगों को ज़्यादा कुछ पता नहीं है और अज्ञात कारणों से ऐसी प्रेरक कहानियों को इतिहासकारों ने लोगों के सामने नहीं आने दिया। ऐसे में सिनेमा इस तरह के अज्ञात नायकों/नायिकाओं को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है। ज्योतिबा और सावित्री फुले भारत में सामाजिक क्रांति के लिए जाने जाते थे और इस फ़िल्म से जुड़े बेहतरीन कलाकार और पूरी टीम, एक उम्दा फ़िल्म बनाने को लेकर बेहद उत्साहित है।

मैं यहाँ यह भी बताना चाहूंगी कि प्रतीक गांधी और पत्रलेखा स्टारर और अनंत महादेवन निर्देशित इस फ़िल्म का निर्माण डॉ. राज किशोर खवाड़े, प्रणय चौकशी, सौरभ वर्मा, उत्पल आचार्य, अनुया चौहान कुडेचा और रितेश कुडेचा ने किया है। यह फ़िल्म 2023 में देश और दुनिया भर में रिलीज़ की जाएगी। साथ ही कंटेट इंजीनियर्स और डांसिंग शिवा के बैनर तले फ़िल्म 'फुले' का निर्माण किया जाएगा। रोचक बात यह भी है कि  इस फ़िल्म को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बड़े पैमाने पर रिलीज़ किये जाने की तैयारी की जा रही है। और मुझे इस फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार रहेगा, क्योंकि प्रतीक और पत्रलेखा दोनों ही मुझे बेहद पसंद हैं और वह इस किरदार को अच्छे से निभायेंगे, इस बात का मुझे पूरा यकीन है।