Exclusive ! Raghuvir Yadav ! पारसी थियेटर ने  मुझे  ऐसा संवारा है कि मैं आज तक किसी एक्टर या डायरेक्टर के सामने नर्वस नहीं हुआ

Exclusive ! Raghuvir Yadav ! पारसी थियेटर ने मुझे ऐसा संवारा है कि मैं आज तक किसी एक्टर या डायरेक्टर के सामने नर्वस नहीं हुआ

Anupriya Verma

कुछ कलाकारों को किसी बाकायदा मंच की जरूरत नहीं होती है, वो अमिताभ बच्चन का डायलॉग है न ! हम जहाँ खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है और मेरा मानना है कि ठीक इसी तर्ज पर, कुछ कलाकार जहाँ मौजूद हो जाएं, वहीं उनका मंच हैं, जहाँ वह अपने हुनर को दर्शाने में पीछे नहीं रहते हैं। कुछ ऐसे ही कलाकारों में एक नाम मैं मशहूर कलाकार रघुबीर यादव को मानती हूँ। अभिनय से लेकर संगीत तक, ऐसा कौन सा हुनर है, जिसमें रघुबीर माहिर नहीं। हाल ही में मेरी मुलाकात उनसे अमेजॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली सीरीज 'पंचायत सीजन 2' के सिलसिले में हुई और मैं एकदम उनके ऑ में आ गई, जब मैंने उन्हें हर एक दूसरे मिनट पर, कभी कोई राग, तो कभी कोई तान, तो कभी कोई किस्से कहानियां सुनीं, एक कलाकार हमेशा तैयार होता है, उन्हें देख कर इस बात पर यकीन हुआ, आज तक रघुबीर यादव सक्रिय हैं, उनकी एनर्जी में कोई कमी नहीं आई है, क्योंकि उन्हें अपने फन से बेइंतहा मोहब्बत है, ऐसे में उन्होंने अपने सफर के बारे में न सिर्फ दिलचस्प बातें की हैं, बल्कि दिलचस्प अंदाज में बातचीत की है, जिसके अंश मैं यहाँ शेयर कर रही हूँ। रघुबीर यादव अपने करियर के इस मुकाम का श्रेय पारसी थियेटर को देते हैं। वह ऐसा क्यों मानते हैं, उन्होंने वे बातें भी विस्तार से कही हैं

पारसी  थियेटर से मिली है मजबूत नींव

रघुबीर यादव बताते हैं कि उन्हें पारसी थियेटर से काफी मजबूत नींव मिली है।

वह विस्तार से अपने पारसी थियेटर के अनुभव को बताते हैं

मैं कभी किसी एक्टर के सामने नर्वस नहीं हुआ हूँ, इसकी सबसे बड़ी वजह पारसी थियेटर रहा है। वहां मेरा सामना  ऐसे खलीफे और उस्तादों से हुआ है, जिनकी वजह से मेरी जुबान बेहतर हुई। मैं तो बुंदेलखंडी बोलता था। वहां ऐसे कई शब्द थे, जिनका फर्क नहीं पता था। लेकिन उन्होंने मुझे निखारा, मैं वहां काफी कुछ सीखा।  मुझे पारसी थिएटर में रोज के दो रुपये 50 पैसे मिलते थे, ऐसे में मैंने वहां कई सालों काम किया, वहां मैं भूखा भी होता था, लेकिन मेरे बेस्ट दिन वहीं के हुआ करते थे।  मुझे वहां काफी सीखने को मिला।  उस थियेटर में अनु कपूर के पिता की नाटक मंडली हुआ करती थी।  वह कमाल के एक्टर थे और वैसे एक्टर मुझे पूरी इंडस्ट्री में कोई नजर नहीं आता है। वहां जो कुछ सीखा है, आज भी मेरे साथ है और उसकी की रोजी रोटी के साथ जी रहा हूँ।

पारसी थियेटर के बारे में वह आगे कहते हैं

मेरा मानना है कि  इंसान को संतुष्ट नहीं होना चाहिए, चीजों को खोजते रहना चाहिए, यह सब भी मैंने पारसी थियेटर में रहते हुए सीखा है। एक एक्टर का संतुष्ट होना, उसकी नईया डूबने जैसा है, यही वजह है कि जो मजा सीख जाने में नहीं, बल्कि कुछ न कुछ नया करने की छटपटाहट में है.


एक्टिंग इंस्टीट्यूशन खोलने के पक्ष में नहीं हूँ

रघुबीर यादव स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वह अपने नाम पर कोई अकादमी नहीं शुरू करना चाहते हैं, बल्कि वह वर्कशॉप करके भी खुश रहते हैं।

वह विस्तार से अपनी बात पर राय रखते हैं

दरअसल, मैं बच्चों को सिखाता रहता हूँ। कभी मैं ड्रामा  स्कूल एनएसडी चला जाता हूँ, तो हाल ही में लोनावला में जाकर मैं एक्टिंग के छात्रों को वर्कशॉप दिया, मैं एन्जॉय करता हूँ, इस तरह से नए लोगों को सिखाने में।  मैं तो वर्कशॉप में आये लोगों से कहता हूँ, मैं भी सीखने आया हूँ, आप भी सीखिए, मैं भी सीखता हूँ। मुझे कोई स्कूल नहीं खोलना है, क्योंकि वह धंधा का रूप ले लेगा, तो परेशानी होगी। मुझे तो ऐसा लगता है कि एक्टिंग शब्द ही गलत है, आपको किरदार करना आना चाहिए बस।

महिला पुरुष समान मानता हूँ

रघुबीर यादव स्पष्ट रूप से कहते हैं

'पंचायत' शो में भले ही महिला के मुहर पर प्रधान जी अपना शासन चला रहे हैं लेकिन रीयल लाइफ में वह दोनों को बराबर मानते हैं, वह कहते हैं, मैं तो खुद खाना बना लेता हूँ, पूरे घर का काम कर लेता हूँ, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता, न ही मन में ऐसी कोई बात है।

असली हिंदुस्तान गांव में है, इसलिए पंचायत करती है रिलेट

रघुबीर यादव का मानना है कि दर्शकों ने पंचायत को इसलिए पसंद किया है, क्योंकि हिन्दुस्तान गांवों का देश है।

वह कहते हैं

मेरा मानना है कि हिंदुस्तान गांवों का देश है। और इसकी सबसे बड़ी पहचान पंचायत है।  मैं तो खूब रहा हूँ जाकर गांव और देहातों में।  पंचायत जैसी कहानियां ऐसे ही माहौल को सामने लाने की कोशिश करती है और सहजता से करती है, इसलिए लोग इससे खूब कनेक्ट हो रहे हैं।

वाकई, मुझे तो पूरा यकीन है कि अपने फन में माहिर रघुबीर यादव इस बार भी पंचायत के नए सीजन में प्रधान जी के किरदार से प्रभावित करने वाले हैं, उन्हें स्क्रीन पर देख कर ही यह बातें स्पष्ट हो जाती हैं कि वह हमेशा नए करने की धुन में रहते हैं, और मेरा मानना है कि यही वजह है कि वह आम लोगों से आज भी इतने सालों के बाद कनेक्ट बना सके हैं और लोग उनसे बोर नहीं हुए हैं। रघुबीर यादव का यह शो 20 मई 2022 से अमेजॉन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होगा।