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Exclusive ! Neetu Kapoor ! यह सच है कि अब भी मेन स्ट्रीम सिनेमा में महिला प्रधान फिल्में बनाने से कतराते हैं, रोज-रोज गंगूबाई नहीं बनती है 

Exclusive ! Neetu Kapoor ! यह सच है कि अब भी मेन स्ट्रीम सिनेमा में महिला प्रधान फिल्में बनाने से कतराते हैं, रोज-रोज गंगूबाई नहीं बनती है 

Anupriya Verma

मुझे नीतू कपूर की सबसे अच्छी बात यही लगती है कि वह जो भी बातें करती हैं, दिल से करती हैं। साथ ही साथ वह किसी बात पर अपनी राय रखने से चूकती नहीं हैं। ऐसे में हाल ही में वरुण धवन और कियारा आडवाणी की फिल्म जुग जुग जियो के प्रोमोशन के दौरान  मैंने जब उनसे महिला प्रधान फिल्मों को लेकर बातचीत की, तो उन्होंने अपनी राय रखी। उनके जमाने में बॉडी शेमिंग होती थी या नहीं, इस पर भी उन्होंने खुल कर बातचीत की है। मैंने यहाँ उसके अंश शेयर करने की कोशिश की है। 

हमारे जमाने में नहीं होती थी डायटिंग

नीतू कपूर बताती हैं कि उनके ज़माने में कोई भी मेकर्स डायटिंग करने अभिनेत्रियों को नहीं कहते थे 

वह बताती हैं 

हमारे जमाने में अभिनेत्रियों को थोड़ा हेल्दी दिखाना ही पसंद करते थे मेकर्स, डायटिंग या बॉडी शेमिंग जैसा कुछ नहीं होता था, उल्टा मेकर्स कहते थे थोड़ा खाया पिया करो, तो अब जितना बच्चों को या नहीं अभिनेत्रियों को मेंटेन करना होता है स्क्रीन के लिए, हमें नहीं करना होता था और इसलिए मैं अब इतनी कॉन्सस हुई हूँ, वरना मैं भी कॉन्सस नहीं रही कभी। हाँ, यह सच है कि जब जीनत अमान आयीं, वह बहुत फिटनेस फ्रीक थीं और उनके आने के बाद, धीरे-धीरे स्लिम अंदाज अभिनेत्रियों का आने लगा, वह एक तरह से इस मामले में ट्रेंड सेटर रहीं।

अब लिखे जाने हैं महिलाओं के लिए रोल, मगर 

नीतू कपूर का कहना है, हाँ, महिलाओं को अब अच्छे रोल मिल रहे हैं, मगर फिर भी कमर्शियल लिहाज से अभी और बदलाव की जरूरत है। 

वह कहती हैं 

अब कितने सारे एवेन्यू खुल गए हैं, ओटीटी में तो महिलाओं के लिए खूब सारा काम है और अच्छे किरदार लिखे जा रहे हैं, लेकिन मेन स्ट्रीम की बात की जाए तो अब भी दिक्कतें हैं, यहाँ हर रोज गंगूबाई नहीं बनती है। यहाँ एक गंगूबाई बनी, संजय लीला भंसाली के कारण, लेकिन लोग अब भी रिस्क नहीं ले रहे हैं, वह खर्चा नहीं करेंगे, लेकिन ओटीटी ने सबको मौका दिया है, जैसे मैं ही नेटफ्लिक्स के लिए एक वेब सीरीज कर रही हूँ, मेरे लिए अच्छा रोल लिखा गया है, फिल्म जुग जुग जियो में मेरे लिए अच्छा कैरेक्टर लिखा गया है, सो अब स्ट्रांग वीमेन किरदार सामने आ रहे हैं।

हमारे जमाने में नहीं होती थी डायटिंग

नीतू कपूर बताती हैं कि उनके ज़माने में कोई भी मेकर्स डायटिंग करने अभिनेत्रियों को नहीं कहते थे 

वह बताती हैं 

हमारे जमाने में अभिनेत्रियों को थोड़ा हेल्दी दिखाना ही पसंद करते थे मेकर्स, डायटिंग या बॉडी शेमिंग जैसा कुछ नहीं होता था, उल्टा मेकर्स कहते थे थोड़ा खाया पिया करो, तो अब जितना बच्चों को या नहीं अभिनेत्रियों को मेंटेन करना होता है स्क्रीन के लिए, हमें नहीं करना होता था और इसलिए मैं अब इतनी कॉन्सस हुई हूँ, वरना मैं भी कॉन्सस नहीं रही कभी। हाँ, यह सच है कि जब जीनत अमान आयीं, वह बहुत फिटनेस फ्रीक थीं और उनके आने के बाद, धीरे-धीरे स्लिम अंदाज अभिनेत्रियों का आने लगा, वह एक तरह से इस मामले में ट्रेंड सेटर रहीं। 

Source : Instagram I @neetu54

मिस करती हूँ अपनी माँ और ऋषिजी दोनों को 

नीतू कपूर कहती हैं कि वह अपनी माँ और ऋषि कपूर दोनों को बहुत मिस करती हैं। 

वह कहती हैं 

यह सच है कि ऋषिजी मुझे लेकर ओवर पोजेसिव थे, मेरी माँ भी ओवर प्रोटेक्टिव थी। लेकिन वो दोनों ही मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते थे, इसलिए ऐसा था। वे दोनों चाहते थे कि इनको कोई नुकसान न पहुँचाये। वहीं ऋषि जी भी मेरे साथ कितने खुश थे, हमलोग दोनों हमेशा घूमने-फिरने की प्लानिंग बनाते थे, तो ऐसा नहीं है कि अभी मुझे आजादी मिल गई है, तो मैं बहुत खुश हूँ, मैं तो उन्हें अधिक मिस करती हूँ, मेरे कम्पैनियन चले गए, बहुत बड़ी बात होती है। अभी कहीं भी टाइम स्पेंड करने के लिए किसी का साथ चाहिए होता है, तो सभी व्यस्त रहते हैं। अपने लोगों के साथ की अलग बात होती है। मुझे ख़ुशी होगी कि मैं आजादी को अपनों के लिए सैक्रिफाइस कर दूँ तो। 

वाकई, मैं मानती हूँ कि  फैमिली वीमेन हों, तो नीतू कपूर की तरह ही होनी चाहिए, उन्होंने जिस तरह से अपने परिवार के लिए सबकुछ समझौते किये, उन्हें इस बात का अफ़सोस नहीं है, इस बातचीत के बाद, तो उनके लिए मेरी रिस्पेक्ट और बढ़ गई है।